पल में अपना, पल में पराया
हे ज़िन्दगी का यही दस्तूर
काश हम भी खेल पाते युही दिल से
बन सकते ज़ालिम हूबहू
समेत के दिल के टुकड़ो को, हम भी चल दिए
खूबसुरत एहसास साथ लिए,दर्द से आगे निकल चले.
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पल में अपना, पल में पराया
हे ज़िन्दगी का यही दस्तूर
काश हम भी खेल पाते युही दिल से
बन सकते ज़ालिम हूबहू
समेत के दिल के टुकड़ो को, हम भी चल दिए
खूबसुरत एहसास साथ लिए,दर्द से आगे निकल चले.
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